लघुकथा

मनोविज्ञान

"अरे सुनीता आ गई, दीवाली अच्छी रही तुम्हारी"... पत्नी जी ने मेड को देखकर पूछा।

"हां आंटी जी अच्छी रही" कह कर वो काम मे जुट गई। सुनीता 24-25 साल की है और इस कालोनी के कई घरों में काम करने जाती है।
"अच्छा सुन ये ले 200 रुपये इनाम के और मिठाई का डब्बा" दरियादिली दिखाते हुए श्रीमती जी ने कहा। " धन्यवाद आंटी जी" सपाट भाव से कह कर वो किचन की ओर मुड़ी।

"आज तेरी साड़ी बहुत अच्छी लग रही है दीवाली में खरीदी थी क्या?" "अरे नही आंटी जी ये तो 105 नंबर वाली शर्मा मैम ने दी थी गिफ्ट में और साथ मे 1100 रुपये इनाम के भी"..सुनीता चहकते हुए बोली.."सच कहूं तो रानी हैं शर्मा मैम इस कॉलोनी की।"

दो हजार का एक नोट लाकर उसे पकड़ाते हुए श्रीमती जी बोलीं "सुन, वो मैट्रिक पास बुढ़िया मेरा क्या मुकाबला करेगी, मनोविज्ञान की प्रोफेसर हूँ मैं समझी साठ हजार कमाती हूँ महीने का...और हां इस कॉलोनी की रानी कौन है अब बता तो ज़रा?"

"मैं तो ऐसे ही बोल रही थी रानी तो आप ही हैं मैम" सुनीता मुस्कुरा कर काम मे लग गई।
और मैं पेपर में आँखे गड़ाए सोच रहा था कि असली मनोविज्ञान का प्रोफेसर है कौन?

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